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Sunday, December 20, 2009

तलाश


तेरा चेहरा है इक किताब जिसमे ये दिल अपना अफसाना तलाशता है
तू इस कदर से है मेरी जिंदगी में शामिल कि गजलों में मेरी तुझे ये ज़माना तलाशता है
औ जानता है कि इस इश्क में दर्द के सिवा कुछ ना मिलेगा
जानता है कि इस इश्क में दर्द के सिवा कुछ ना मिलेगा
फिर भी हर घडी शमा को ये परवाना तलाशता है
औ तेरे सिवा अब कुछ सूझता नहीं इसको
तेरे सिवा अब कुछ सूझता नहीं इसको
कि महफिलों में भी तन्हाई ये दीवाना तलाशता है
औ मत पूछ इस दीवाने का तेरी जुदाई में हाल
मत पूछ इस दीवाने का तेरी जुदाई में हाल
कि मयखाने से निकला नहीं, फिर मयखाना तलाशता है
औ समंदर किनारे जाता है तो ना जाने कितने लम्हे जाते हैं
समंदर किनारे जाता है तो ना जाने कितने लम्हे जाते हैं
बनाया था जो कभी मिल के, रेत का वो आशियाना तलाशता है
तेरा चेहरा है इक किताब जिसमे ये दिल अपना अफसाना तलाशता है
तू इस कदर से है मेरी जिंदगी में शामिल कि गजलों में मेरी तुझे ये ज़माना तलाशता है

1 comment:

  1. Very impressive..but as far as my memories go, you have written loads of poems during your college days and even before that.

    I would suggest ki tujhe apna Papa ke poems bhi blog per publish karna chahiye with some kind of copyright info.

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