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Wednesday, March 31, 2010

उनकी बेरुखी

वो मुझे मेरे सवालों का जवाब नहीं देते
लत डालकर वो मेरी मुझे शराब नहीं देते
औ मांगते हैं मुझको मुझी से जन्मों के लिए 
जो अपने पिछले जन्मों का मुझे हिसाब नहीं देते
औ बसा के जिसको यादों में जुदाई सह तो सकूं 
क्यों इक ऐसा लम्हा, खयालात, मुझे जनाब नहीं देते
औ चढ़ाएंगे वो ही गुलदस्ते कब्र पर मेरी
मेरे मांगने पर भी जो मुझे गुलाब नहीं देते
वो मुझे मेरे सवालों का जवाब नहीं देते 

1 comment:

  1. bahut khoob! maza aa gaya.
    Judaai ka dard ab bhi utna hi jawaan hai jitna 10 saal pahle hua karta tha.
    Bhale hi raakh ke neeche dab gayi hon per chingariyan abhi bhi aangaron ke hone ka suboot de rahi hain.

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