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Sunday, December 20, 2009

किताब


मेरी जिंदगी है गर इक किताब
तो उस किताब का इक पन्ना है तू
या यूं समझ इसको सनम
इक पन्ने की है किताब मेरी

तलाश


तेरा चेहरा है इक किताब जिसमे ये दिल अपना अफसाना तलाशता है
तू इस कदर से है मेरी जिंदगी में शामिल कि गजलों में मेरी तुझे ये ज़माना तलाशता है
औ जानता है कि इस इश्क में दर्द के सिवा कुछ ना मिलेगा
जानता है कि इस इश्क में दर्द के सिवा कुछ ना मिलेगा
फिर भी हर घडी शमा को ये परवाना तलाशता है
औ तेरे सिवा अब कुछ सूझता नहीं इसको
तेरे सिवा अब कुछ सूझता नहीं इसको
कि महफिलों में भी तन्हाई ये दीवाना तलाशता है
औ मत पूछ इस दीवाने का तेरी जुदाई में हाल
मत पूछ इस दीवाने का तेरी जुदाई में हाल
कि मयखाने से निकला नहीं, फिर मयखाना तलाशता है
औ समंदर किनारे जाता है तो ना जाने कितने लम्हे जाते हैं
समंदर किनारे जाता है तो ना जाने कितने लम्हे जाते हैं
बनाया था जो कभी मिल के, रेत का वो आशियाना तलाशता है
तेरा चेहरा है इक किताब जिसमे ये दिल अपना अफसाना तलाशता है
तू इस कदर से है मेरी जिंदगी में शामिल कि गजलों में मेरी तुझे ये ज़माना तलाशता है

दीवाना हूँ मैं

इस दुनिया में कौन कहता है की गम से बेगाना हूँ मैं
देता हूँ किसी के होटों पे मुस्कराहट तो क्या बुरा है गर दीवाना हूँ मैं
औ मंजिलें ढूंढ सकता हूँ दूसरों की आखिर
मंजिलें ढूंढ सकता हूँ दूसरों की आखिर
क्या हुआ जो अपने ही शहर की गलियों से अनजाना हूँ मैं
औ दोस्ती, प्यार, वफ़ा सब कोरी बातें लगती हैं
दोस्ती, प्यार, वफ़ा सब कोरी बातें लगती हैं
जब पाता हूँ की कुछ नहीं हूँ
बस उसकी बेवाफईओं का इक अफसाना हूँ मैं
कि जिसको दिल दिया था कभी ये सोच कर
गर साज़ हो तुम तो तराना हूँ मैं
औ मत आओ करीब मेरे कि अब कुछ ना मिलेगा
कुछ नहीं हूँ बस किसी महफ़िल का वीराना हूँ मैं
बस इतनी मेरी कहानी, इतना मेरा मुक्क़दर
बस इतनी मेरी कहानी, इतना मेरा मुक्क़दर
कि मय नहीं बाकी, मगर मयखाना हूँ मैं
कि किसी कि चाहतों का उजड़ा हुआ इक आशियाना हूँ मैं
फिर भी देता हूँ किसी के होटों पे मुस्कराहट तो क्या बुरा है गर दीवाना हूँ मैं